वाणी प्रकाशन : एक नई हिंदी किताब रोज़

वाणी प्रकाशन 50 साल से हिंदी पुस्तकों का प्रकाशन कर रहीं है और 4500 से ज्यादा किताबें आज तक प्रकाशित कर चुकी हैं | वाणी प्रकाशन की अदिति महेश्वरी ने प्रिंटवीक को भारत में हिंदी किताबों की महत्ता के बारे में बताया | इस अंग्रेजी आर्टिकल की कुछ हिंदी में झलकियाँ प्रस्तुत हैं |

किताबों का मातम मनाने वालों की ज्यादा मत सुनिए | किताबें भारत में अच्छी चल रही हैं, खासकर की भारतीय भाषाओँ वाली |

वाणी प्रकाशन एक आम प्रकाशक नहीं है | वह लोकप्रिय (पोपुलर) किताबें सस्ते में नहीं निकालते | उनकी दृष्टि हिंदी के प्रसंग में विश्वीय है | वहां जापानी माँगा कॉमिक्स का भी हिंदी में अनुवाद चल रहा है |  यह दर्शाता है की वाणी दुनिया भर का साहित्य हिंदी के दायरे में प्रस्तुत करना चाहता है | कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और नोबेल पुरस्कृत के साथ वे काम कर रहें हैं | इसके अलावा उन्होंने कई दलित, नारीवादी और आदिवासी लेखकों को भी प्रकाशित किया है |

अदिति कहती हैं की छपी हुई किताबें कभी भी ख़त्म नहीं होंगी | पिछले कुछ वर्षों में कई नई शैलियों, पाठकों और कहानियों का विकास हुआ है | वाणी एक साल में 225 से अधिक नई किताबें प्रकाशित करती है | “ऐसा लगता है की हम हर दिन एक नई किताब को अपनी टेबल पर देखते हैं |”

उन्हें अपने मार्किट शेयर के बारे में पता नहीं है क्यूंकि इसके लिए भारत में प्रकाशन के डेटा की कमी है | बेस्ट-सेलर होने के लिए किताब की, 2 साल के अन्दर, 5000-7000 कापियां बिकनी चाहिए | पर वाणी को अपनी हर किताब पसंद है और वे सब किताबों को बराबर मानते हैं |
बिक्री के हिसाब से किताबों, साहित्य और भाषा का मूल्यांकन नहीं होना चाहिए |

अदिति के इस बात से हम पूरी तरह सहमत हैं | वाणी इसी तरह बेहतरीन हिंदी पुस्तकें निकालते रहे | क्या आपने कोई वाणी प्रकाशन की किताबें पढ़ी हैं ?

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2 thoughts on “वाणी प्रकाशन : एक नई हिंदी किताब रोज़

  1. दुर्गेश कुमार

    सर/मैडम
    मुझे अपनी एक किताब प्रकाशित करानी है जिसमें ५० पेज हैं मुझे कृपया कर के बतायें कि कितना खर्चा आ सकता है वह किताब वर्तमान के चलते काल-क्रमण पर आधारित है जोकि शायरियों के माध्यम से लिखित है|

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    1. prachur Post author

      हम लोग किताबें प्रकाशित नहीं करते हैं| आपको एक प्रकाशक से बात करनी होगी|

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